Fatima Sheikh भारत की पहली मुस्लिम शिक्षकों में से एक थीं, जिन्होंने  Savitribai और Jyotiba Phule ज्योतिबा द्वारा संचालित स्कूल में दलित बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था ।

Fatima Sheikh और उनके भाई ने स्कूल के लिए अपना घर दे दिए थे ।

सावित्रीबाई और ज्योतिबा फुले के साथ घनिष्ठ संबंध होने के बावजूद, हम आज उन्हें भूल चुके हैं।

उन्होंने सावित्रीबाई को अपने घर में "स्वदेशी पुस्तकालय" नामक अपना पहला लड़कियों का स्कूल स्थापित करने में मदद की।

दलितों को अपने स्कूल मैं पढ़ाने के वजह से उच्च जाती के लोग उनपर पत्थर मारने लगे और रूढ़िवादी मुसलमानो ने भी बिरोध जताया ।

इतने बिरोध और तकलीफ के बावजूद उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा ।

फातिमा शेख का जीवन उन सामाजिक सुधारों के लिए एक वसीयतनामा के रूप में खड़ा है जो स्वतंत्रता के पहले भारतीय महिलाओं द्वारा समर्थित थे।

फातिमा शेख तब घर-घर जाकर परिवारों को अपनी बेटियों का नामांकन कराने के लिए मनाती थीं।

सवर्ण पुरुषों और महिलाओं ने उन पर कीचड़ और गोबर फेंका और सड़कों पर चलते हुए हर तरह की गालियाँ दीं, फिर भी फातिमा शेख दलितों के हक्क के लिए डटी रहीं।

अपने जीबन मैं दलितों के हक्क के लिए कियेगए इन् संघर्षो के वजह से google doddle आज उन्हें सम्मानित किया है ।

INFOGURU के तरफ से इन महान-आत्मा को प्रणाम ।  जय हिन्द